****मेरे अजीज दोस्तों इससे पहले कि मैं अपने दिली जज्बात आप लोंगो कि खिदमत मैं पेश करूँ, मैं अपने दो शब्द अर्ज करना चाहूंगी कि मैं ना तो कोई फनाकारा हूँ ना ही कोई शायरा, जो कुछ भी लिखा है, सिर्फ और सिर्फ अपने तहे दिल कि आवाज़, उसके जज्बात व एहसास ही हैं जिन्हें मैंने चंद कागज़ के पन्नो पर अपने टूटे फूटे शब्दों मैं ढाल कर उतार देती हूँ ,इनमें कह्नी भी झूठ बनावट , कल्पना या किसी प्रकार कि नक़ल जैसी कोई चीज शामिल नहीं है
इसीलिए इनका नाम मैंने दिले- सुकून रखा है और अन्त में यही कहना चाहूंगी *****
हमने कलम शाही मैं नहीं
खूने - जिगर मैं डुबो के लिखी है "
" हमने अपने दिल को जुबां बना लिया
दिल कि हर आवाज़ को शेरों मैं ढल दिया "
" ठेस लगी जब दिल को यारों
टुकड़े टुकड़े हो गया
बटोर सका ना दर्दे - दिल जब अपना
शेरों मैं ढल कर आ गया "
" दिल तन्हां जाँ तन्हां
ऐसा लगा सारा जहाँ तन्हां
मगर जहाँ जरा हंसके देखा
वहीँ लगा सब अपना अपना "
इसीलिए इनका नाम मैंने दिले- सुकून रखा है और अन्त में यही कहना चाहूंगी *****
" यह झूठ और बनावट नहींहकीकत लिखी है
हमने कलम शाही मैं नहीं
खूने - जिगर मैं डुबो के लिखी है "
" हमने अपने दिल को जुबां बना लिया
दिल कि हर आवाज़ को शेरों मैं ढल दिया "
" ठेस लगी जब दिल को यारों
टुकड़े टुकड़े हो गया
बटोर सका ना दर्दे - दिल जब अपना
शेरों मैं ढल कर आ गया "
" दिल तन्हां जाँ तन्हां
ऐसा लगा सारा जहाँ तन्हां
मगर जहाँ जरा हंसके देखा
वहीँ लगा सब अपना अपना "
" सरोज पितलिया "

My first attempt. Need your good wishes.
ReplyDeleteAmazing!
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